माँँ अम्बे गौरी की आराधना करने से भक्तों के सभी दु:ख दुर हो जाते है , शक्ति स्वरूपा मां सभी प्रकार के कष्टों को हरण करने वाली है, संसार में ऐसी कोई भी परम शक्ति नहीं है जो मां की शक्तियों को चुनौती प्रदान कर सके इसलिए मां का हमेशा स्वच्छतापूर्वक स्मरण करना सदैव लाभकारी होता है, मां सभी विध्न बाधाओं केा दुर कर देती मां कि विशेष पूजा नवरात्री में करना बहुत ही लाभकारी माना गया है। पर दैनिक रूप से भी मां आराधना भी उतना ही लाभकारी होता है।
श्री अम्बे गौरी की आरती
जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामागौरी ।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रम्हा शिव री ।। जय अम्बे
मागा सिंदुर विराजत टीको मृगमदको ।
उज्ज्वलसे दोउ नैना, चंद्रवदन नीको।। जय अम्बे
कनका समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
रक्त पुष्प गल माल , कण्ठनपर साजे ।। जय अम्बे
केहरि वाहन रजत, खड्ग खपर धारी ।
सुर नर मुनि जन सेवत , तिनके दुखहारी ।। जय अम्बे
कानन कुण्डल शोभित , नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर सम राजत ज्योती ।। जय अम्बे
शुम्भ निशुम्भ विदारे , महिसासुर घाति ।
धुम्रविलोचन नैना निशिदिन मदमाती ।। जय अम्बे
चण्ड मुण्ड संहारे , शोणितबीज हरे ।
मधु कैटभ दौउ मारे , सुर भयहीन करे।। जय अम्बे
ब्रम्हाणी ,रूद्राणी तुम कमलारानी ।
आगम निगम बखानी , तुम शिव पटरानी ।। जय अम्बे
चौसठ योगिनि गावत , नृत्य करत भैरूँ ।
बाजत ताल मृदंगा औ बाजत डमरू ।। जय अम्बे
तुम ही जगकी माता , तुम ही हो भरता ।
भक्तन की दुख हरता सुख सम्पति करता ।। जय अम्बे
भुजा चार अति शेाभित , वर मुद्रा धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ।। जय अम्बे
कंचन थाल विराजत अगर कपुर बाती ।
श्रीमालकेततुमें राजत कोटिरतन ज्योति ।। जय अम्बे
श्री अम्बे की आरती जो कोइ नर गावै ।
कहत शिवानँद स्वामी ,सुख सम्पति पावै ।। जय अम्बे

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