|| Maa Gauri Ki Aaradhna Aarti ||

।।आरती श्री विंध्‍यवासि‍नी देवी जी की।।





Mata Vidhyvashni | Maa Durga|bhgawan Krishna|Saktipith


आरती श्री विंध्‍यवासि‍नी देवी जी की

 

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनि, तेरा पार न पाया ।। टेक ।।

पान सुपरी ध्‍वजा नारियल , ले तेरी भेंट चढाया ।।  

सुवा चोली तेरे अंग विराजै, केशर तिलक लगाया ।

नंगे पांव तेरे अकबर जाकर, सोने का छत्र चढाया ।।

ऊँचे  ऊँचे  पर्वत बना देवालय, नीचे शहर बसाया ।

सत्‍युग त्रेता द्वापर मध्‍ये, कलयुग राज सवाया ।।

धूप दी नैवेद्य आरती , मोहन भेाग लगाया ।

ध्‍यानू भगत मैया तेरा गुण गावैं, मन वांछित फल पाया ।। 

 

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